कोर्ट पीस कैसे खेलें: पूरे नियम
कोर्ट पीस — जिसे रंग, कोट पीस और हुकुम भी कहा जाता है — चार खिलाड़ियों का खेल है, जो दो जोड़ियों में खेला जाता है। इस खेल की कोई आधिकारिक किताब नहीं है: यह मेज़ पर सीखा जाता है और इलाक़े के साथ बदलता है। ये नियम खेलकर लिखे गए हैं, और जहाँ किसी इलाक़े में नियम अलग है, वहाँ यह साफ़ लिखा गया है।

वीडियो: रंग की पूरी गाइड, छह मिनट में
इस पेज की हर बात असली रंग टेबल पर खेलकर दिखाई गई है: टॉस, पत्तों का बँटवारा, तुरुप रखना, रंग डालना और काटना, पुरानी गिनती, चारों मोड, और साथी के साथ इशारों वाले गुर। आवाज़ उर्दू में है, YouTube पर हिंदी सबटाइटल हैं।
क्या चाहिए
चार खिलाड़ी और बिना जोकर के 52 पत्तों की गड्डी। आपका साथी आपके सामने बैठता है, इसलिए बारी दोनों टीमों के बीच बदलती रहती है। बंटवारा और चाल दोनों उल्टी दिशा (एंटी-क्लॉकवाइज़) में चलते हैं। एक हाथ तेरह चालों का होता है और पूरी गड्डी बाँटी जाती है।
टॉस: पहला तुरुप कौन बोलेगा
पहले हाथ में किसी एक खिलाड़ी को तुरुप बोलने का हक़ देने की कोई वजह नहीं होती, इसलिए टॉस होता है। हर खिलाड़ी गड्डी में से एक पत्ता चुनता है और सब अपना पत्ता खोलकर दिखाते हैं। जिस टीम के पास सबसे बड़ा पत्ता हो, वही तुरुप बोलती है। बराबरी होने पर टॉस दोबारा होता है।
पत्तों का बंटवारा
हाकिम — यानी जो तुरुप बोलेगा — को पहले पाँच पत्ते मिलते हैं। वह सिर्फ़ उन्हीं पाँच पत्तों को देखकर तुरुप बोलता है। इसके बाद बाक़ी पत्ते चार-चार करके बाँटे जाते हैं — पाँच, फिर चार, फिर चार — और हर खिलाड़ी के पास तेरह पत्ते आ जाते हैं। तुरुप अधूरी जानकारी पर बोला जाता है, इसीलिए यह हुनर माँगता है।
तुरुप (रंग) बोलना और तेरहवीं का नियम
तुरुप को रंग, तुरुप और हुकुम — सब कहा जाता है, और वह रंग पूरे हाथ में बाक़ी तीनों पर भारी रहता है। अगर हाकिम को अपने पाँच पत्ते पसंद न आएँ तो उसके पास दो रास्ते हैं: वह दोबारा बंटवारा माँग सकता है, आम तौर पर तब जब उसके पास दहले से बड़ा कोई पत्ता न हो; या वह कह सकता है कि तुरुप उसके तेरहवें पत्ते से तय होगा। इसे तेरहवीं कहते हैं — जो पत्ता आख़िर में आए, उसी का रंग तुरुप बन जाता है। दोनों नियम चलते हैं।
चाल कैसे चलती है
अगर आपके पास चले हुए रंग का पत्ता है तो वही डालना ज़रूरी है। अगर नहीं है तो आप कोई भी पत्ता डाल सकते हैं, तुरुप भी — मगर तुरुप काटना ज़रूरी नहीं, आप कोई और पत्ता भी फेंक सकते हैं। चाल वही जीतता है जिसने सबसे बड़ा तुरुप डाला हो; अगर तुरुप न डला हो तो चले हुए रंग का सबसे बड़ा पत्ता जीतता है। जीतने वाला अगली चाल चलता है।
हाथ जीतना और अगला तुरुप कौन बोलेगा
तेरह में से सात चालें ले लें तो हाथ आपका। अगला तुरुप कौन बोलेगा, यह पिछले हाथ के नतीजे पर है: अपना बोला हुआ हाथ जीत लें तो तुरुप आप ही बोलते रहेंगे; हार जाएँ तो हक़ विरोधी टीम के पास चला जाता है; और अगर आपने कोर्ट लगा दिया यानी सारे तेरह ले लिए, तो तुरुप बोलने का हक़ आपके अपने साथी के पास चला जाता है।
स्कोरिंग: नाम ही नंबर हैं
हारा हुआ हाथ शून्य। सात-छह से जीतें तो 7। ख़ुद तुरुप बोलकर सारे तेरह ले लें तो 13 — यही कोर्ट है, जिसे कोट भी कहते हैं। और अगर तुरुप विरोधी ने बोला हो और सारे तेरह आप ले जाएँ तो 52 — यही बावन है, यानी गून कोर्ट। बावन का मतलब ही 52 है, और बयासी का 82: यह सबसे दुर्लभ दावा है, जिसमें खिलाड़ी अपने पत्ते विरोधियों को दिखाकर कहता है कि फिर भी सारे तेरह मैं लूँगा।
पत्तों के नाम
मेज़ पर पत्ते अंग्रेज़ी नामों से नहीं पुकारे जाते। इक्का, बादशाह, बेगम या मलिका, और ग़ुलाम — जिसे गोला भी कहते हैं। इसके बाद नाम गिनती पर चलते हैं: दहला, नहला, अठी, सत्ती, छिक्की, पंजी, चौकी, तिग्गी और दुग्गी। रंगों के भी नाम हैं: हुकुम, पान, ईंट और चिड़िया। और तुरुप का इक्का? उसे कोई नहीं काट सकता। इसीलिए जो मुश्किल वक़्त में बाज़ी पलट दे, उसे भी तुरुप का इक्का कहते हैं।
रंग के गुर: साथी के साथ इशारों में खेलें
रंग साथी का खेल है। हाथ के बारे में बात करना मना है, इसलिए अच्छे खिलाड़ी पत्तों से बात करते हैं। ज़्यादातर मेज़ों पर ये इशारे समझे जाते हैं।
- किसी रंग की पहली चाल आम तौर पर बताती है कि चलने वाला उस रंग में कमज़ोर है। आपके साथी ने रंग रखा और पहली चाल चिड़िया की चली? समझ लीजिए चिड़िया में उसके पास न इक्का है, न बादशाह।
- आप भी चिड़िया में कमज़ोर हैं? तो अपना सबसे बड़ा पत्ता डालें ताकि सर अपने हाथ में रहे, और अगली चाल फिर चिड़िया की चलें।
- चिड़िया में मज़बूत हैं? तो सर बेगम या ग़ुलाम जैसे बीच के पत्ते से लें। साथी समझ जाएगा कि चिड़िया आप संभाल लेंगे।
- जब आपके पत्ते अच्छे हों तो चाल बदल दें और वह रंग चलें जिसमें आप कमज़ोर हैं, जैसे पान। साथी जान जाएगा कि पान में आपको मदद चाहिए।
- साथी सर ले रहा हो तो अपना बड़ा पत्ता बर्बाद न करें, छोटा पत्ता डाल दें।
तुरुप की गिनती
गड्डी में तेरह तुरुप होते हैं, और उनकी गिनती रखना वह आदत है जो सबसे ज़्यादा हाथ जिताती है।
- शुरू में अपने तुरुप गिन लें। आपके पास चार हैं तो बाक़ी नौ, तीन खिलाड़ियों के पास हैं।
- जो भी तुरुप गिरे, गिनते जाएँ। तुरुप की एक पूरी चाल में चार तुरुप निकल जाते हैं।
- जो खिलाड़ी तुरुप की चाल पर तुरुप न डाले, उसके तुरुप ख़त्म हो चुके हैं। याद रखें वह कौन था।
- जब सारे तुरुप निकल जाएँ तो आपका इक्का और बादशाह कोई नहीं काट सकता, फिर बेफ़िक्र होकर चलें।
शिष्टाचार और बेईमानी
कोर्ट पीस जोड़ी का खेल है और साथी को अपने पत्ते बताने का कोई जायज़ तरीक़ा नहीं। खेल के दौरान साथी से बात करना साफ़ बेईमानी माना जाता है। विरोधी के पत्तों में झाँकना बदतमीज़ी है। इशारों का एक बड़ा संदिग्ध इलाक़ा भी है: पत्ता ज़ोर से फेंकना, आख़िरी तुरुप पर उँगली मारना, कोई तय शब्द, या नज़रों का इशारा — कोई मेज़ इसे जायज़ नहीं कहती, मगर सख़्ती हर मेज़ पर अलग है।
रेनेग: वह बेईमानी जो हाथ का फ़ैसला करती है
सबसे गंभीर बात इशारे नहीं, रेनेग है: चले हुए रंग का पत्ता होते हुए यह दिखाना कि आपके पास नहीं है, और कोई दूसरा पत्ता डालकर उसे छिपा लेना। चूँकि रंग का पालन ज़रूरी है, यह चोरी है और एक ही बार पूरे हाथ का रुख़ बदल सकती है। मेज़ पर यह पकड़े जाने पर निर्भर है; ऑनलाइन खेलते हुए यह मुमकिन ही नहीं, क्योंकि खेल आपको सिर्फ़ वही पत्ते चलने देता है जो नियम से जायज़ हों।
ये नियम कहाँ से आए
कोर्ट पीस की न कोई आधिकारिक संस्था है, न कोई छपी हुई किताब। यहाँ जो लिखा है वह उस व्यक्ति के अपने खेलने का निचोड़ है जिसने यह साइट बनाई — सिंध के शहरों और गाँवों में, पंजाब में, और जर्मनी में खेली गई मेज़ों से। यह किसी और लेख से नक़ल नहीं किया गया, और यही वजह है कि वही कुछ ग़लतियाँ एक पन्ने से दूसरे पन्ने पर जाती रहती हैं। जहाँ नियम वाक़ई इलाक़े के साथ बदलता है, वहाँ यह बात लिख दी गई है। अगर आपकी मेज़ पर कोई नियम अलग है तो ज़रूर बताइए — उसे भी यहीं शामिल कर लिया जाएगा।
इलाक़ाई फ़र्क़
कोर्ट पीस की कोई किताब कभी नहीं लिखी गई। यह मेज़ पर आगे बढ़ता है, इसलिए कई जगह एक इलाक़े का नियम सबका नियम बनाकर लिख दिया जाता है। सबसे साफ़ मिसाल ख़ुद लफ़्ज़ कोर्ट है। कई लेखों में सात चालें जीतने को कोट कहा गया है, जबकि सिंध के शहरों में, ख़ासकर कराची में, कोर्ट सिर्फ़ और सिर्फ़ सारे तेरह को कहते हैं और सात-छह महज़ एक जीत है। दोनों ग़लत नहीं — दोनों अलग मेज़ें हैं। इसलिए बेहतर है कि खेल शुरू करने से पहले तय कर लिया जाए कि आज किस नियम पर खेला जाएगा।
आम सवाल
कोर्ट पीस में कितने खिलाड़ी होते हैं?
चार खिलाड़ी, दो जोड़ियों में, और साथी एक-दूसरे के सामने बैठते हैं। बंटवारा और चाल दोनों उल्टी दिशा में चलते हैं।
पत्ते कैसे बाँटे जाते हैं?
हाकिम को पहले पाँच पत्ते मिलते हैं और वह उन्हीं पर तुरुप बोलता है। इसके बाद बाक़ी पत्ते चार-चार करके बाँटे जाते हैं — पाँच, चार, चार — जब तक हर खिलाड़ी के पास तेरह न हो जाएँ।
तेरहवीं का नियम क्या है?
अगर हाकिम को अपने पाँच पत्ते पसंद न आएँ तो वह तुरुप बोलने के बजाय कह सकता है कि तुरुप उसके तेरहवें पत्ते से तय होगा। जो पत्ता आख़िर में आए, उसी का रंग तुरुप बन जाता है।
क्या रंग न होने पर तुरुप काटना ज़रूरी है?
नहीं। चले हुए रंग का पालन ज़रूरी है, मगर अगर वह रंग आपके पास न हो तो आप कोई भी पत्ता डाल सकते हैं। तुरुप काटना आपकी मर्ज़ी है।
बावन और बयासी का क्या मतलब है?
बावन यानी 52: तुरुप विरोधी ने बोला और सारे तेरह आप ले गए। बयासी यानी 82: खिलाड़ी अपने पत्ते दिखाकर दावा करता है कि फिर भी सारे तेरह लेगा, और ले जाता है।
कोर्ट सात चालें हैं या सारे तेरह?
यह इलाक़े पर है। कई लेखों में सात चालों को कोट कहा गया है, मगर सिंध के शहरों में और ख़ासकर कराची में कोर्ट का मतलब सारे तेरह है। खेल से पहले तय कर लें।
इन नामों से भी जाना जाता है: Court Piece · Coat Pees · Hukum · حکم · Rung · رنگ · Troeff Call · Trump